डरावने भूत की कहानी | भूतिया कहानियां | Bhut Ki Kahani | Bhoot Story In Hindi

छोटे बच्चे जब अपनी जिद पर आ जाये तो उनको मनाना माता पिता के लिए किसी जंग जीतने से कम नहीं है। ऐसे में उनको यदि मजेदार रोमांचक कहानियां, भूतिया कहानियां या भूत की कहानी सूना दी जाए तो उनकी शरारत भी काम हो जाती है और उनको सीख भी मिलती है।

Bhut Ki Kahani | भूत की कहानी | भूतिया कहानियां

इस लेख में 5 भूत की कहानी जिनमे अंधेरे में मिले भूत की कहानी, भूतिया पेड़ के भूत की कहानी, हल जोतने वाले भूत की कहानी,भूतिया ढाबा के भूत की कहानी और रास्ते वाले भूत की कहानी के बारे में बताया गया है जो रोमांचक होने के साथ-साथ डरावनी भी है। तो आज से ही बच्चो को निचे दी गयी भूत की कहानी सुनाना शुरू करें और खुद भी इन रोमांचक कहानियों का आनंद ले। 

तो चलिए पढ़ना शुरू करते है भूत की कहानी और मजेदार भूतिया कहानियां

अंधेरे में मिले भूत की कहानी | Bhoot Ki Kahani

Bhut Ki Kahani | भूत की कहानी | भूतिया कहानियां
Bhoot Story In Hindi | भूत की कहानी | भूतिया कहानियां

रतनापुर नाम का एक बहुत पुराना गावं था, जहाँ सभी किसान खेती करके अपना जीवन गुजारते थे। गांव के पास वाले जंगल में पीपल के पेड़ में एक भूत रहता था जो दिन भर तो किसी को दिखाई नहीं देता लेकिन जैसे ही रात होती वह गांव वालों को परेशान करने लग जाता था।

रात होते ही वह पूरे गांव में घूमने लगता और किसानो की गाय भैंसों को बहुत नुकसान पहुंचाता, और कभी-कभी तो खेत में काम कर रहे, किसानों को वह इतना डराता कि उन किसानों को रात में नींद ही नहीं आती। भूत का डर गांव में इतना फैल गया था, कि शाम होते ही गांव का कोई भी इंसान घर से बाहर निकलने से भी डरता था।

एक बार भूत से परेशान होकर गांव वालों ने एक बहुत बड़े साधु को अपने गांव में आमंत्रित किया और  उनको अपनी समस्या बताकर भूत से छुटकारा दिलाने की गुजारिश की। गांव वाले साधु को पीपल के पेड़ के पास ले गए जिसमें भूत रहता था। साधु ने अपने तंत्र-मंत्र से भूत को अपने काबू में करने की कोशिश की लेकिन वह उसकी से काबू में नहीं कर सका।

कुछ दिनों के बाद तांत्रिक साधु ने भूत को पकड़ने के लिए एक उपाय निकाला और सब गांव वालों को इकट्ठा करके बताया की भूत केवल रात में ही इस पेड़ से बाहर आता है, यानी इस भूत को दिन की रोशनी से डर लगता है और रोशनी की सहायता से ही इस भूत को पकड़ सकते हैं साधु की बात सुनकर सभी गांव वाले भूत को पकड़ने के लिए एक योजना बनाते हैं।

रात होते ही जब भूत पेड़ से बाहर निकलता है तो गांव वाले जलती हुई मसाल से भूत के चारों ओर उजाला कर देते हैं, अपने चारों ओर रोशनी को देखकर वह भूत बहुत डर जाता है और वापस पेड़ की तरफ दौड़ने लगता है सभी गांव वाले भी उसके पीछे-पीछे भागकर उसी पेड़ के पास चले जाते हैं। रोशनी में तांत्रिक भूत को उस पेड़ से बांध देता है सभी गांव वाले मिलकर उसे भूत को पेड़ के साथ ही जला देते हैं इस प्रकार गांव वाले भूत की समस्या से छुटकारा पा लेते हैं।

कहानी से सीख :  समस्या चाहे किसी कैसी भी हो अगर इंसान अपने बुद्धि का उपयोग करें तो से बड़ी समस्या को हल किया जा सकता है।

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भूतिया पेड़ के भूत की कहानी | Bhoot Ki Kahani

Bhut Ki Kahani | भूत की कहानी | भूतिया कहानियां
Bhoot Story In Hindi | भूत की कहानी | भूतिया कहानियां

देवपुरा नाम का एक शहर था जिसके राजा का नाम देव सिंह था। राजा हमेशा अपनी प्रजा के हितों के लिए तत्पर रहता था। पंजाबी अपने राजा से बहुत खुश थी। एक दिन अचानक एक बाज आकाश में एक भूतिया पेड़ के बीज लेकर उड़ता हुआ दिखाई दिया जैसे ही बाज देवपुरा से गुजरा तो उसके मुंह से एक बीज छूटकर देवपुरा गांव के बीचो-बीच गिर गया।
चूंकि बीज एक भूतिया पेड़ का था इसलिए वह भी अगले ही दिन पौधा बन गया। जब गांव वालों ने पौधे को देखा तो वह आश्चर्यचकित हो गए, क्योंकि पौधे का रंग काला था तो गांव वाले आपस में चर्चा करने लग गए और गांव वालों को लगा कि खेत में उगने वाली कोई खरपतवार होगी। गांव वालों ने उसको देखा देखा तो पौधा बहुत बड़ा हो गया था गांव वाले पौधे को देखकर अचंभित हो गए की एक दिन में पौधा इतना बड़ा कैसे हो गया।

धीरे-धीरे तीसरे दिन पौधा पेड़ बन गया। कुछ समय बीतने के बाद गांव के लोग उसको देखो तेजी से बढ़ता हुआ देखकर परेशान होने लग गए। गांव वाले इस पौधे की समस्या को लेकर अपने राजा के पास गए और राजा को बताया कि एक पौधा तीन दिन में पेड़ बन गया। जैसे ही गांव वालों ने राजा को उसे पेड़ की बात बताई राजा स्वयं भी उस पेड़ को देखने के लिए पहुंच गया और पौधे का काला रंग का देखकर राजा भी उसे पौधे को बड़ी हैरानी से देखने लगा।

राजा जब चौथे दिन उसे पेड़ के पास पहुंचा तो वह बहुत बड़ा हो चुका था पेड़ को इतनी तेजी से बढ़ता हुआ देखकर राजा को यकीन नहीं हो रहा था। पेड़ को बढ़ता हुआ पेड़ का रंग देखकर राजा समझ गया कि किसी ने जादू टोना किया है, तो राजा ने तुरंत घोषणा कर दी कि जो भी इस पेड़ को काटकर खत्म करेगा उसे 1000 सोने के सिक्के दिए जाएंगे। साथ ही राजा ने घोषणा कर दी कि जो इस पेड़ को काटेगा वह मेरे मरने के बाद मेरी राजगद्दी का उत्तराधिकारी होगा

इतनी बड़ी घोषणा सुनने के बाद गांव वाले तथा राजा के सभी चतुर मंत्री भी उस पेड़ को काटने की योजना बनाने लग गए, लेकिन पेड़ को कोई भी नहीं काट पाया। गांव वालों ने उसे पेड़ के चारों ओर आग लगा दी, लेकिन पेड़ को कोई नष्ट नहीं कर पाया फिर राजा के एक मंत्री ने उसे पेड़ को रस्सियों से बांधकर हाथी से खिंचवाया, लेकिन फिर भी पेड़ को कुछ नहीं हुआ।

इतना सब कुछ होने के बाद गांव वालों के मन में डर बैठ गया कि यह पेड़ कोई ऐसा वैसा पेड़ नहीं, बल्कि एक भूतिया पेड़ है। कि इस घोषणा का पता गांव के एक समझदार व्यक्ति को चला वह व्यक्ति तुरंत इस पेड़ से जुड़े राज को जानने के लिए अपने गुरु के पास गया।

अब लोगों के मन में डर बैठ गया और उन्हें लगा कि पक्का यह ऐसा वैसा नहीं, बल्कि भूतिया पेड़ है। तभी उस गांव के एक समझदार व्यक्ति को राजा की घोषणा का पता लगा। जानकारी मिलते ही वह अपने गुरु के पास भूतिया पेड़ से जुड़े रहस्य को जानने के लिए पहुंच गया।

गुरुजी ने अपनी शक्तियों से उसे पेड़ का पता लगाया और उसे व्यक्ति से पूछा की क्या तुम इस पेड़ को खत्म करना चाहते हो?

समझदार व्यक्ति ने जवाब दिया हां गुरुजी में इस पेड़ को खत्म करना चाहता हूं सभी गांव वाले इस पेड़ से परेशान है।

गुरु जी ने उसे व्यक्ति को बताया कि इस पेड़ को खत्म करने का एक ही उपाय है तुम्हें इस पेड़ के चारों ओर नमक डालना होगा।

गुरुजी से उसे पेड़ को खत्म करने का उपाय जानकर वह व्यक्ति तुरंत अपने राजा के पास गया और राजा से कहा महाराज हमें इस पेड़ के चारों ओर नमक डालना होगा तभी यह पेड़ खत्म होगा। यह सुनकर राजा ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि पेड़ के चारों ओर खूब सारा नमक डाल दिया जाए। तुरंत उसे पेड़ के चारों ओर नमक डालने लग गए।

नमक डालने के 1 दिन बाद वह पेड़ थोड़ा  छोटा हुआ। धीरे-धीरे 5 दिन गुजर गए और पांचवें दिन वह पेड़ बहुत छोटा हो गया और अगले दिन वह पेड़ गलकर गायब हो गया। होने के अगले दिन राजा ने उसे व्यक्ति को अपने महल में बुलाया और इनाम में 1000 सोने के सिक्के तथा एक पत्र दिया जिसमें लिखा था कि मेरे मरने के बाद मेरी राजगद्दी का उत्तराधिकारी यह व्यक्ति होगा।

कहानी से सिख : कहानी से सीख ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान ना हो जरूरत है तो बस धैर्य और समझदारी की।

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हल जोतने वाले भूत की कहानी | Bhoot Ki Kahani

Bhut Ki Kahani | भूत की कहानी | भूतिया कहानियां
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एक गांव में मंगल सिंह नाम का एक पहलवान रहता था, उसके पास पांच भैंसे थी। उसकी दिनचर्या भेसौ को खाना पानी देना और भैंसों का दूध पीना ही थी। रोजाना भैंसों का दूध पीने से उसका शरीर बहुत ताकतवर हो गया था। सहायता और सारे के लिए वह अपने पास हमेशा एक बस की लकड़ी रखता था।  मंगल सिंह के ताकतवर शरीर को देखकर गांव के लोग उससे डरते थे।

मंगल सिंह अनाथ था उसका अपना इस दुनिया में कोई भी नहीं था। इसलिए वह अपनी बढ़ती हुई उम्र को देखकर अपने विवाह के बारे में चिंतित रहने लगा। इस कारण जब भी उसे कोई गांव का बड़ा बुजुर्ग मिलता तो वह उसे अपनी शादी के बारे में पूछता कि उसकी शादी कब कहां और किस होगी? मोहन के हाउसफुल शरीर को देखकर लोग उससे डरते थे और उसके सवाल का कोई जवाब नहीं दे पाते थे इस कारण मंगल सिंह गांव के लोगों के साथ मारपीट भी किया करता था, गांव के लोगों ने जिस रास्ते से मंगल सिंह जाता था उसे रास्ते से जाना बंद कर दिया।

एक बार किसी दूसरे गांव का ब्राह्मण और नाई गांव के विवाह समारोह में शामिल होने जा रहे थे। रास्ते में उन्हें मंगल सिंह मिल गया। उनको अपने पास बुलाया और उनसे कहा कि आप दोनों मुझे ज्ञानी ज्ञानी पुरुष लगते हो तो मुझे एक बात बताइए कि मेरी शादी कब कहां और किस होगी? मंगल सिंह की बात को सुनकर दोनों मां ही मन हंसने लगे। ब्राह्मण एक चतुर व्यक्ति था उसने सोचा कि अगर हम इसे बहस करेंगे तो उसकी ताकत के आगे टिक नहीं पाएंगे तो ब्राह्मण को एक उपाय सूझा दूध एक तार के पैर की ओर अपने हाथ से इशारा करते हुए कहा कि आपकी शादी वही होगी। ब्राह्मण की बात सुनकर मंगल सिंह बहुत खुश हुआ और उसने अपनी पांचो भेसे ब्राह्मण को दान में दे दी और उसे पेड़ की दिशा में चल पड़ा। 

एक औरत अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहती थी। उसे औरत का पति एक नंबर का आलसी और झूठा व्यक्ति था और उसके पति को हर बात पर झूठ बोलने की आदत थी। झूठ बोलने की आदत से वह औरत बहुत परेशान थी अपने पति की झूठ बोलने की आदत से वह औरत बहुत परेशान थी। बहुत दूर पैदल चलने के बाद मंगल सिंह उसे पेड़ के पास पहुंचा तो उसने उसे औरत को देखा। मंगल सिंह जैसे ही मंगल सिंह जैसे ही उसे औरत के घर के आंगन में प्रवेश करता है वह लाड लड़खडाकर गिर गया और उसे औरत के गले पड़ गया।

उसे औरत को लगा की पहलवान उसके पति को जानता होगा। उसे औरत ने मंगल सिंह को मेहमान कक्षा में बैठने के लिए कहा उसके लिए चाय पानी बनाने लग गई। थोड़ी देर बाद औरत का पति घर आया तो उसने अपनी पत्नी को किसी गैर मर्द के साथ देखा तो उसने पूछा कि कौन है यह आदमी तो औरत ने डरते हुए कहा कि मुझे लगा कोई आपका जानकार होगा इसलिए उसे घर के अंदर आने दिया। 

अपनी पत्नी की बात सुनकर और भी आग बबुला हो गया और मोहन को मारने के लिए उसकी और झपटा। मोहन ने अपने बचाव के लिए अपनी लोहे की ऋण निकाली और उसे व्यक्ति के सर पर दे मारी जिससे वह व्यक्ति वही मर गया। अपने पति की हालत को देखकर वह औरत रोने लगी ऐसे माहौल को देखकर पहलवान वहां से जाने लगा तो उसकी औरत ने पहलवान को रोक लिया और कहा कि उसके पति के अलावा हमारे घर में कमाने वाला कोई नहीं था और उसकी मृत्यु के बाद अब तुम्हें कमाकर हमारा भरण पोषण करना होगा ।

इसके बाद पहलवान में ही रहने लगा। कुछ दिनों बाद कुछ दिनों बाद जब घर का राशन खत्म होने लगा तो उसे औरत ने पहलवान से कहा कि बाहर जाओ और कुछ कामाकर लेकर आओ या फिर राजा के पास जाकर खेती के लिए जमीन मांगो ताकि वहां पर खेती करते हम अपना भरण पोषण कर सकें।

उसे औरत की बात सुनकर पहलवान अपनी लोहे की चढ़ उठाकर राजा की महल की ओर चल पड़ा। पहलवान जैसे ही महल के पास पहुंचा तो महल के बाहर खड़े द्वारपालपुर सैनिक पहलवान केसरी को देखकर डरने लगे और तुरंत अपने राजा तक सूचना पहुंच की एक बलवान भक्ति हाथ में लोहे की इच्छा लेकर महल की और तेजी से आ रहा है। राजा ने तुरंत अपने मंत्री को बुलाया और कहा कि उसे रोक कर उसके यहां आने का कारण पूछा जाए।

राजा का आदेश लेकर मंत्री तुरंत अपने सैनिकों को लेकर उसे रोकने के लिए वहां पहुंचा और वहां जाकर पहलवान से महल आने का कारण पूछा तो पहलवान ने बताया कि मुझे खेती करने के लिए जमीन चाहिए इसी के लिए मैं महाराज से विनती करने आया हूं। मंत्री जैसे ही पहलवान का संदेश लेकर राजा के पास पहुंचा तो राजा ने आदेश दिया कि तुरंत उसे ढेर सारी जमीन खेती के लिए दे दी जाए। मंत्री बहुत चतुर्ता तो है राजा द्वारा दी गई अधिकांश जमीन को अपने पास रखकर पहलवान को शमशान के पास में एक बंजर जमीन का छोटा सा टुकड़ा दे देता है जिस प्रकार पहलवान वापस अपने घर लौट जाता है।

पहलवान जैसे ही उसे बंदर जमीन के पास पहुंचता है वह देखता है की जमीन के बीच में एक बरगद का पेड़ है जिसमे पर भूत रहते हैं। पहलवान जमीन को फसल उगाने लायक बनाने के लिए उसे जमीन की जुताई शुरू करता है, लेकिन खेत के बीच में बरगद का पेड़ होने के कारण से उसको खेत की जुताई करने में बहुत परेशानी होती है। पहलवान सोचता है कि क्यों ना इस पेड़ को काट दिया जाए जिसे मुझे फसल की जुताई करने में आसानी रहेगी और इतना सोचकर पहलवान अपनी लोहे की जड़ से उसे पेड़ पर प्रहार करता है। पहलवान के प्रहार से उसे पेड़ में से करीब 150 भूत पेड़ से नीचे गिर जाते हैं। भूत को करने के लिए उसकी तरफ तेजी से दौड़ते हैं। पहलवान भूतों को अपनी और आता देखकर अपने बचाव के लिए वह अपनी छड़ी से भूतों को मारना शुरू कर देता है और सभी भूतो  के छक्के छुड़ा देता है। 

पहलवान की ताकत को देखकर भूत सोचते हैं कि इसे जितना बहुत कठिन है पहलवान से उसे पर लोगों ने काटने गुजारिश करने लगते हैं। भूत रहते हैं कि यह हमारा घर है और हम कई साल से यहां रह रहे हैं हमारे घर को मत तोड़ो। भूत रहते हैं कि अगर तुम हमारे घर को नहीं तोड़ोगे तो हम इसके बदले में तुम्हारे घर पर खाने-पीने का राशन डाल देंगे। पहलवान को भूतों पर दया आ जाती है और उनका उनकी बात सुनकर वह अपने घर चला जाता है इसके बाद दूध समय-समय पर पहलवान पर राशन पहुंचाने लगे।

कुछ समय बाद इन भूतों का गुरु अपने शिष्यों से मिलने आता है और अपने शिष्यों को कमजोर देखकर वह उनसे इसका कारण पूछता है तो भूत पहलवान की बात अपने गुरु को बताते हैं और गुरु उनसे कहता है कि मैं पहलवान को सबक सिखाऊंगा। इसके बाद गुरु पहलवान को सबक सिखाने के लिए उसके घर की ओर चल पड़ता है घर के बाहर पहुंच कर गुरु बिल्ली का रूप धारण करके पहलवान पर हमला करने की योजना बनाता है। इन दोनों पहलवान भी एक बिल्ली से बहुत परेशान था क्योंकि वह रोजाना के घर में घुसकर उसका सारा दूध पी जाती थी। उसे दिन पहलवान भी उसे बिल्ली को सबक सिखाने के लिए दरवाजे के पीछे छिपकर कुछ बिल्ली का इंतजार करता है कि जैसे ही बिल्ली आएगी मैं उसे पर हमला कर दूंगा। जैसे ही भूतों का गुरु बिल्ली का रूप धारण करके पहलवान के घर में प्रवेश करता है पहलवान जोर से उसे पर हमला कर देता है।

पहलवान के हमले से भूतों के गुरु की हालत पतली हो जाती है और वह अपने असली रूप में आता है और पहलवान से अपनी जान की भीख मांगने लगता है। भूत के गुरु को छोड़ने के लिए उससे कहता है कि तुम्हें अपनी सजा खुद तय करनी होगी। सजा के रूप में अपनी सजा के रूप में भूत का ग्रुप पहलवान से कहता है कि अगर तुम मुझे छोड़ दोगे तो मैं तुम्हारे घर पर आने वाली राशन को दोगुना कर दूंगा। भूत के गुरु की इस बात पर पहलवान थोड़ी देर सोच विचार करने के बाद उसे माफ कर देता है और जाने के लिए कहता है। यह सुनकर भूतों का गुरु तुरंत पहलवान के घर से चला जाता है। 

पहलवान के घर से निकालकर गुरुजी तुरंत अपने शिष्यों के पास जाते हैं और उनसे कहते हैं कि पहलवान के घर पर जाने वाले राशन की मात्रा को तुरंत दोगुना कर दिया जाए, तो भूत अपने गुरु जी से इसका कारण पूछते हैं तो गुरुजी पहलवान की सारी बात अपने शिष्यों को बताता है 

कहानी से शिक्षा :  अगर आपका समय ताकतवर है तो मुसीबतें भी अवसर में बदल जाती हैं।

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भूतिया ढाबा के भूत की कहानी | Bhoot Ki Kahani

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गुजरात के एक शहर में माया नाम की एक औरत अपने बच्चों के साथ रहती थी। एक दिन बच्चों ने अपनी मां से पिकनिक जाने के लिए कहा। पिकनिक का नाम सुनते ही माया बहुत डर गई क्योंकि उसकी कुछ पुरानी यादें ताजा हो गई। 

यह बात 2018 की है जब माया 9 वीं कक्षा में पढ़ती थी। एक दिन स्कूल के अध्यापकों ने क्लास के सभी स्टूडेंटों को पिकनिक ले जाने का प्लान बनाया। अपने दोस्तों के साथ माया ने भी पिकनिक जाने के लिए हां कर दी। स्कूल के सभी अध्यापकों ने तय किया की पिकनिक पर पावागढ़ जाएंगे। अगले दिन शाम को कक्षा के सभी छात्र-छात्राएं और अध्यापक पिकनिक के लिए निकल गए।

माया अपने दोस्तों के साथ बस में सबसे पीछे वाली सीट पर बैठ गई। सभी छात्र-छात्राएं हंसी मजाक करते हुए जा रहे थे। तभी कुछ दूर जंगल का रास्ता तय करने के बाद अचानक इस बस से तेज आवाज आई इस समय गरीब रात के 1:30 बजे थे। बस के ड्राइवर ने बस से नीचे उतर के दिखा तो पता चला कि बस का पीछे वाला टायर फट गया है।

ड्राइवर ने सभी से कहा कि कृपया सभी नीचे उतर जाए कृपया सभी नीचे उतर जाएं और पास वाले ढाबे से चाय नाश्ता कर लीजिए तब तक मैं इस फटे हुए टायर को बदलने की कोशिश करता हूं। 

ड्राइवर की बात सुनकर सभी बच्चे और अध्यापक बस से नीचे उतरकर पास वाले ढाबे की ओर जाने लगे। वहां पर एक वृद्ध व्यक्ति चाय बना रहा था। इतनी रात को ढाबा खुला हुआ और वहां किसी को चाय बनाते हुए देखकर सभी को बहुत आश्चर्य हुआ। 

उसे बूढ़े व्यक्ति ने सभी से कहा कि आप सब लोग चाय पी लीजिए । बूढ़े व्यक्ति ने उन्हें बताया कि इस रास्ते पर गाड़ियां खराब हो जाती है इसलिए मैं अपना ढाबा हमेशा खुला रखता हूं ताकि आप जैसे रागिनी रॉकी कुछ मदद हो जाए और इससे मेरी कुछ कमाई हो जाती हैं।

उसे मृत व्यक्ति की बात सुनकर सभी ने चाय का ऑर्डर दे दिया। उसे व्यक्ति ने कुछ ही देर में सबके लिए चाय बना कर उनकी टेबल पर रख दी। चाय पीते हुए माया की नजर अचानक ढाबे के पास एक बरगद के पेड़ की और पड़ी उसने वहां पर एक औरत को सफेद साड़ी में खुले बाल लहराते हुए देखा। कुछ देर बाद वह औरत जोर-जोर से हंसने लगी पर उसे औरत के हंसने की आवाज माया के अलावा किसी और को सुनाई नहीं दे रही थी और ना ही वह औरत किसी और को दिखाई दे रही थी। 

यह सब देखकर माया बहुत डर गई और उसने अपने आंखें नीचे कर ली। डरते हुए माया ने जैसे ही अपनी चाय पीना दोबारा शुरू की वैसे ही अचानक पास वाले जंगल से जोर-जोर से किसी के चिल्लाने की आवाज आने लग गई। वहां पर चाय पी रहे सभी बच्चे और अध्यापक इस आवाज को सुनकर डर गए। सबको डरा हुआ देखकर उसे मृत व्यक्ति ने कहा कि मैं देख कर आता हूं क्या हुआ है, आप सभी लोग यहीं बैठे रहो इतना बोलकर मैं वृद्ध व्यक्ति थी उसे आवाज की दिशा में चल पड़ा।

तभी एक लड़की को लगातार खून की उल्टी होने लगी उसको देखकर सभी बच्चे और छात्र और भी डर गए। तभी एक टीचर ने बच्चों को हौसला देते हुए कहा कि तुम सब पास से कुछ लकडीयां लेकर आओ और आज जलाकर और मेरे बगल में आकर बैठ जाओ। सभी आग जलाकर गोल घेरा बनाकर बैठ गए। टीचर ने सभी को चेतावनी दी कि अकेले कोई कहीं नहीं जाएगा। 

बैठे-बैठे सभी को 3:00 बज गए। तब कहीं जाकर वह मृत व्यक्ति जंगल से लौट कर आया। व्यक्ति ने सभी बच्चों और अध्यापकों की ओर देखते हुए कहा कि आप सब लोग उसे आवाज को भूल जाना नहीं तो सबका जीना मुश्किल हो जाएगा । इतना कर कह कर वह व्यक्ति अपने ढाबे के अंदर चला गया। तभी बस ड्राइवर भी टायर बदल कर बस को लेकर ढाबे पर आ गया। सभी लोग भगवान का नाम लेकर बस में बैठ गए।

अध्यापक ने बस में बैठते ही सबको कहा कि उसे आवाज के बारे में कोई बात नहीं करेगा चुपचाप सो जाओ वैसे भी रात बहुत हो गई है। अध्यापक की बात मानकर सभी लोग बस में ही सो गए। दूसरे दिन सुबह सभी लोग पिकनिक स्पॉट पर पहुंचे और करीब एक हफ्ता घूम कर सभी लोग अपने-अपने घर लौट आए। पिकनिक से लौटते ही सभी बच्चों ने अपने दोस्तों और दूसरी क्लास को बच्चों से इस भूतिया घटना के बारे में बताया। 

आज पिकनिक का नाम सुनते ही माया को यह भूतिया कहानी फिर से याद आ गई और वह बच्चों को पिकनिक पर भेजने से डरने लगी।

कहानी से सीख : अपने अतीत में हुई घटनाओं को भूल जाना ही अच्छा है नहीं तो जीवन भर उसे घटना को याद करके हम डरते रहेंगे।

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रास्ते वाले भूत की कहानी| Bhoot Ki Kahani

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विजय नाम का एक लड़का पावागढ़ के पास में किसी फैक्ट्री में काम करता था। उसका घर फैक्ट्री से करीब 3 किलोमीटर कि दूरी पर था। विजय हमेशा अपनी साइकिल से ही फैक्ट्री आता जाता था। हमेशा की तरह आज भी वह अपने घर से फैक्ट्री जाने के लिए निकला। रास्ते में आने वाले चौराहे पर अचानक उसे एक लड़का दिखाई दिया जो गुस्से में उसको घर रहा था। रवि ने उसे देखा और फिर उसे अनदेखा कर फैक्ट्री चला गया। 

अगले दिन भी वह लड़का वहीं खड़ा था और विजय को घर रहा था। विजय ने उसे अनदेखा करके कम पर चला गया। वह लड़का उसे चौराहे पर खड़ा होकर रवि को घूरता और रवि उसे अनदेखा करके अपने काम पर चला जाता था। 

तकरीबन 8 10 दिन बाद जब विजय फैक्ट्री जा रहा था, तो उसे वह लड़का दिखाई नहीं दिया। मैंने सोचा कि आखिर आज वह लड़का वहां क्यों नहीं है। सोचा कि वह लड़का जब मिलेगा तो उसे पूछूंगा परंतु उस लड़के से कुछ भी पूछने या बात करने से विजय को डर लगता था क्योंकि वह हमेशा विजय को गुस्से में घूरता रहता था। इसी ख्याल के साथ विजय फैक्ट्री पहुंचा और अपना काम करके शाम को घर लौट आया। 

वह लड़का विजय को चौराहे पर नहीं दिखा। एक दिन जब विजय शाम को अपने घर पर पहुंचा, उसे अपने बेड पर एक चिट्ठी देखी।

इस चिट्ठी में लिखा था, कि मेरा नाम अजय है। मैं तुम्हें रोज उसे चौराहे पर दिखता था। कल शाम तुम वहीं खड़े होकर मेरा इंतजार करना। उसे चिट्ठी में एक फोटो थी जो उसे लड़के की ही थी जो विजय को उसे चौराहे पर खड़ा मिलता था। 

इस बात को सोचकर परेशान हुआ कि इस लड़के को मेरे घर का पता कहां से चला और यह एचडी मेरे बेड पर कैसे आई। अगले दिन जब विजय अपने काम पर जाने लगा, तो उसे वह चिट्ठी वाली बात याद आ गई। वह अपनी साइकिल से फैक्ट्री पहुंचा और पूरा दिन उसे लड़के के बारे में सोचता रहा और शाम को मैं अपने घर जाते समय उसे चौराहे पर खड़ा होकर उसका इंतजार करने लगा। काफी देर हो गई, लेकिन वह नहीं आया।

विजय ने बहुत देर तक उसका इंतजार किया, लेकिन जब वह नहीं आया तो विजय अपने घर चला गया। घर आते ही प्रवीण ने सोचा की क्यों ना इस चिट्ठी पर लिखे हुए पत्ते पर जाकर उसे लड़के से मिल जाए। रात होने वाली थी, विजय ने सुबह में उसे लड़के से जाकर मिलने का सोचा। 

विजय सुबह-सुबह ही तैयार होकर उसे चिट्ठी पर लिखा पत्ते पर पहुंच गया। रवि ने उसे पत्ते पर पहुंचकर उसे घर के बाहर की घंटी बजाई तो उसे घर में से एक आदमी बाहर आया। विजय ने उसे व्यक्ति को कहा कि मुझे भी अजय से मिलना है। विजय की बात सुनकर वह व्यक्ति आश्चर्य चकित हो गया। उसे व्यक्ति ने विजय से पूछा कि क्या तुम्हें अजय से मिलना है? परंतु उसे मरे हुए तो 6 महीने हो गए हैं, तुम्हें अब उससे क्या काम है?

जय शंकर विजय के होश उड़ गए। डर के मारे विजय  विजय का शरीर थर थर कांपने लगा। किसी तरह विजय मैं खुद को संभाल और घर लौटते ही सबसे पहले उसे चिट्ठी को जला दिया। विजय के मन मे। जो लड़का मुझे रोजाना दिखता था वह एक भूत था, और एक भूत ने मुझे चिट्ठी भेजी थी। यह सोचकर विजय अपने घर में एक कोने में डर के बैठ गया। उसे दिन के बाद विजय ने तो रास्ते में किसी को देखा और नहीं रास्ते में किसी अनजान व्यक्ति से बात करता था। 

कहानी से सीख : किसी भी अनजान व्यक्ति के बारे में नहीं सोचना चाहिए और ना ही उसे व्यक्ति की सही जानकारी के बिना उसके घर जाना चाहिए

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निष्कर्ष : डरावने भूत की कहानी | Bhut Ki Kahani

आशा है दोस्तों आपको डरावने भूत की कहानी | भूतिया कहानियां | Bhut Ki Kahani | Bhoot Story In Hindi | Story In Hindi के बारे में दी गई जानकारी अच्छी लगी है।इस भूत की कहानी को अपने दोस्तों और परिवार के लोगो के साथ साझा करें। ताकि उनको भी कहानियन पढ़कर अच्छा लगे। इस लेख से संबंधित आपका कोई सवाल है तो Comments बॉक्स में पूछे। हम जल्दी ही जवाब देंगे।

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